दूर कहीँ चिड़ियों का झुंड, सौ - सौ हजारों चिड़ियों का झुंड, मैं जहाँ हूँ वहाँ से वे उडती हुई नहीं तैरती सी दिखती हैं सांझ के धुंधले आसमान के नीचे , कितना सुकून देता है इनको इनका तैरना इस तरफ इन्सान है साथ साथ नहीं चल सकते दो इन्सान , दो कदम भी सुख से....
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